बिहार में महिलाओं की बढ़ती सार्वजनिक भागीदारी

Vol-1 | Issue-1 | August-2014 | Published Online: 05 August 2014    PDF ( 215 KB )
Author(s)
रिन्कु कुमारी 1

1पीएचडी-राजनीति विज्ञान, पटना विश्वविद्यालय,पटना

Abstract

राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर सहमति की मोहर लगना एक उल्लेखनीय राजनीतिक घटना है, लेकिन जब तक यह विधेयक कानून का रूप नहीं ले लेता तब तक इसे ऐतिहासिक कहना सही नहीं होगा। इसी तरह इस पर संतोष नहीं जताया जा सकता कि आखिरकार यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया, क्योंकि भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने वाले इस विधेयक को जिस गरिमा के साथ पारित होना चाहिए था उसका अभाव नजर आया। यह सामान्य बात नहीं कि विधेयक पारित कराने के लिए सदन में मार्शल बुलाने पड़े। इतने महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए ताकत का सहारा लेने की विवशता से यथासंभव बचाया जाना चाहिए था। आखिर डेढ़ दशक से लंबित इस विधेयक पर आम सहमति कायम करने की एक और कोशिश क्यों नहीं की गई? खैर संसदीय गलियारे में महिला आरक्षण विधेयक भले ही मृग-मरीचिका प्रतीत हो रही हो, पर इसे धता बताते हुए महिलाओं ने समय की गति को पहचान लिया है और सार्वजनिक जीवन में बड़ी तेजी से आगे कदम बढ़ा रही हैं।खुशकिस्मती से बिहार की कामयाबी खास कर इस क्षेत्र में उल्लेखनीय है। प्रस्तुत आलेख में इसी की विवेचना की गई है।

Keywords
महिला आरक्षण विधेयक, सार्वजनिक जीवन, मृग-मरीचिका, भागीदारी, बिहार
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