भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का स्वरूप: सामान्य अवलोकन

Vol-6 | Issue-05 | May-2019 | Published Online: 05 May 2019    PDF ( 176 KB )
Author(s)
Dr. Laxmi Narayan 1

1Assistant Professor (Political Science), Govt. College, Malsisar, Jhunjhunu, Rajathan

Abstract

भारतीय राष्ट्रवाद की आधारशिला भारतीय की सनातन संस्कृति न केवल भारतवासियों को एकजुट रखने में सामथ्र्यवान है, अपितु इस सार्वभौम संस्कृति में विश्व के समस्त राष्ट्रों को एकसूत्र में पिरोने का तत्व भी समाया हुआ है। भारतीय संस्कृति के चार मूलभुत सिद्धान्त वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त करने में पूरी तरह सक्षम है। ये सिद्धान्त है-‘वसुधैव कुटुम्बकम’ अर्थात् सम्पूर्ण विश्व एक परिवार की तरह है, ‘एकम् सदविप्राः बहुधा वदन्ति’ अर्थात् भारतीय मनीषियों की यह उद्घोषणा है कि सत्य एक है, विद्वान इसे अलग-अलग तरीकों से कहते हैं, ‘सर्वेभवन्तु सुखिनः’ अर्थात् समस्त प्राणियों का भला हो तथा ‘यत्पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ अर्थात् जो पिण्ड में है वहीं ब्रह्माण्ड में है, आत्मा और परमात्मा में कोई भेद नहीं है। भारतीय संस्कृति का यह वैचारिक आधार इतना ठोस एवं समन्वय है कि भारत समेत सम्पूर्ण विश्व को जोड़ने का सामथ्र्य रखता है।

Keywords
राष्ट्रवाद, संस्कृति, सनातन, हिन्दु, राष्ट्र।
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