मध्यकाल में नारी-शिक्षा
| Vol-5 | Issue-01 | January-2018 | Published Online: 05 January 2018 PDF ( 145 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| संध्या रानी 1 | ||
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1यू॰जी॰सी॰ नेट, इतिहास कानपुर, उ॰प्र॰, भारत |
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| Abstract | ||
तुर्क-अफगान-काल में शासकों तथा समृद्धिशाली पुरुषों के संरक्षण में नारी-शिक्षा भी मंथर गति से प्रगति-पथ पर अग्रसर होती रही। आवश्यकतानुसार शिक्षा-प्रेमी नरेश तथा अन्य व्यक्ति भी नारी-शिक्षा की समुन्नति के लिए प्रयत्नशील रहे। प्रायः हिन्दू और मुसलमान स्त्रियाँ विशेष रूप से धार्मिक तथा उच्चकोटि के साहित्य के पठन-पाठन में अभिरुचि रखती थीं। फिर भी, इस काल में पर्दे की प्रथा तथा बालविवाह के कारण विदुषी नारियों का अभाव खटकता है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि नारियों के लिये योग्य शैक्षणिक संस्थाएँ नहीं थीं। वस्तुतः उनकी शिक्षा उपेक्षित नहीं थी। ‘वाकेआते मुश्ताकी‘ का रचयिता शेख रिज्कुल्लाह मुश्ताकी लिखता है कि सदा से प्रवाहित शिक्षा की पावन धारा इस काल में भी प्रवाहित रही। इस काल में नारियों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ विविध कलाओं की तथा विज्ञान की भी शिक्षा दी जाती थी। |
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| Keywords | ||
| बाल विवाह, सामूहिक अशिक्षा , अलाउद्दीन, हिन्दू । | ||
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