मोबाइल फोन और ग्रामीण
| Vol-8 | Issue-12 | December-2021 | Published Online: 15 December 2021 PDF ( 251 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i12.013 | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Ashok Kumar Meena 1 | ||
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1Assistant Professor, Media and mass communication department, NIMS university Jaipur (Rajasthan) |
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| Abstract | ||
आजकल भारतीय बाजारों में तकनीकी वस्तुओं का बोलबाला है। तकनीकी इतनी सस्ती होती जा रही है, कि हर कोई इससे अछूता नहीं रह सकता। शहर के कारोबारी से लेकर गांव के किसान तक तकनीकी वस्तुओं का उपयोग कर रहे हैं। आज किसान भी गांव में रंगीन टीवी, डी.टी.एच., एफ.एम. रेडियो, पंखा तक उपयोग कर पा रहा है। इतना ही नहीं आज किसान अपनी फसल भी तकनीकी सहायता से ही कर रहा है। फसल के लिए बीज बोने से लेकर फसल काटने तक की प्रक्रिया में तकनीकी सहायता ली जा रही है। यह भी सच है कि इसमें धन अधिक खर्च हो जाता है। हालांकि परम्परावादी अर्थात पहले से चली आ रही प्रक्रिया इतनी खर्चीली नहीं है। इन सबके बीच तकनीकी का सबसे खास उदाहरण है मोबाइल फोन। |
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| Keywords | ||
| तकनीकी, मोबाइल, फोन, ग्रामीण। | ||
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