भारतीय संविधान पर मानवाधिकार दर्शन का प्रभाव

Vol-2 | Issue-3 | March-2015 | Published Online: 05 March 2015    PDF ( 238 KB )
Author(s)
डॉ मंजुलता शर्मा 1

1व्याख्याता, राजनीति विज्ञान, राजकीय महाविद्यालय, निवाई

Abstract

भारतीय संविधान पर मानवाधिकारों के दर्शन का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह संविधान न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उन्हें समानता, स्वतंत्रता, और सामाजिक न्याय के लिए अवसर भी प्रदान करता है। संविधान के विभिन्न प्रावधानों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय नागरिकों को उनके अधिकारों की रक्षा मिले, और राज्य इन अधिकारों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार हो। संविधान ने मानवाधिकारों के दर्शन को संविधान में समाहित किया और भारतीय समाज को एक समतामूलक और न्यायपूर्ण राज्य की दिशा में मार्गदर्शन किया। हालांकि, संविधान में दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर सुधार और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है, ताकि भारत में मानवाधिकारों की पूरी तरह से सुरक्षा हो सके।

Keywords
भारत, संविधान, समतामूलक और न्यायपूर्ण राज्य, मानवाधिकार।
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