‘एका आंदोलन’, अवध में किसान आंदोलनों में ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की भूमिका

Vol-8 | Issue-12 | December-2021 | Published Online: 15 December 2021    PDF ( 261 KB )
DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i12.001
Author(s)
वंशिका शुक्ला 1

1Student Law, Babasaheb Bhimrao Ambedkar University, Lucknow

Abstract

आमतौर पर यह माना जाता है कि भारतीय समाज में समय पर होने वाली उथल-पुथल में किसानों की कोई सार्थक भूमिका नहीं रही है, लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि भारत के स्वाधीनता आंदोलन में जिन लोगों ने शीर्ष स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, उनमें आदिवासियों, जनजातियों और किसानों का अहम योगदान रहा है। होमरूल लीग के कार्यकताओं के प्रयास तथा मदन मोहन मालवीय के दिशा निर्देशों के परिणामस्वरूप फरवरी, सन् 1918 में उत्तर प्रदेश में ‘किसान सभा’ का गठन किया गया। सन् 1919 के अंतिम दिनों में किसानों का संगठित विद्रोह खुलकर सामने आया। इस संगठन को जवाहरलाल नेहरू ने अपने सहयोग से शक्ति प्रदान की। उत्तर प्रदेश के हरदोई, बहराइच एवं सीतापुर जिलों में लगान में वृद्धि एवं उपज के रूप में लगान वसूली को लेकर अवध के किसानों ने ‘एका आंदोलन’ नामक आंदोलन चलाया।

Keywords
किसान आंदोलन, किसान आंदोलन और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, गांधी जी एवं किसान आंदोलन, किसान आंदोलनों के कारण एवं विचारधारा
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