भारत में महिला मानवाधिकारः सामान्य विवेचन
| Vol-1 | Issue-2 | September-2014 | Published Online: 05 September 2014 PDF ( 172 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| महेन्द्र कुमार राजपुरोहित 1 | ||
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1शोधार्थी, व्याख्याता (राजनीति विज्ञान) राजकीय दरबार आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, जोधपुर (राज.) |
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| Abstract | ||
संसार में ईश्वर की अनुपम कृति मानव है। मानव की उत्पति का इतिहास अति प्राचीन है। इसका विकास विभिन्न चरणों से हुआ है। मानव के विकास के साथ ही उसे अधिकार की आवश्यकता महसूस हुई। इस आवश्यकता को ही मानवाधिकार कहा जाता है। मानव को अपनी गरिमा बनाये रखने के लिये मानवाधिकरों की आवश्यकता है। मानव को जीवन की कल्पना अधिकारों के बिना नहीं की जा सकती। वस्तुतः किसी व्यक्ति के मानव होने और मानवबने रहने के लिये अधिकार अनिवार्य है। मानवाधिकारों को स्वीकार करने से मानव सभ्यता का विकास संभव हुआ है। |
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| Keywords | ||
| मानवाधिकार, अनुपम, जकड़, जंजीरों, शोषण, इतिहास, असमानता, जनसाधरण। | ||
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