भाव-वैविध्य का विशाल सागर सूरसागर
| Vol-8 | Issue-10 | October-2021 | Published Online: 15 October 2021 PDF ( 262 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i10.003 | ||
| Author(s) | ||
डा0 वन्दना शर्मा
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1एसोसियेट प्रोफेसर-हिन्दी विभाग, मुलतानीमल मोदी काॅलेज, मोदीनगर (गाजियाबाद)-201204 |
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| Abstract | ||
सूरदास हिंदी साहित्य के विशाल कालखंड में अपना अप्रतिम स्थान रखने वाले महाकवि हैं। विशाल प्रबंध काव्य सूरसागर इनकी प्रसिद्धि का आधार हैप् सूरसागर एक ऐसा विशाल ग्रंथ है जिसमें हमें जीवन और समाज के सभी भाव-व्यापार व्यापक रूप में दिखाई देते हैं। यह ग्रंथ तत्कालीन समाज के साथ-साथ हमारे वर्तमान समाज का भी प्रतिनिधित्व करता है। प्रस्तुत शोध आलेख में इस महान और कालजयी कृति में भावों की विविधता और समृद्धि का अवलोकन और समाज के संदर्भ में उसकी व्याख्या करने का प्रयास किया गया है। |
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| Keywords | ||
| साहित्य, संस्कृति, समाज, भाव, वैविध्यता। | ||
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