यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ के उपन्यास ‘ढोलन कुंजकली’ में निहित संवेदना

Vol-8 | Issue-01 | January-2021 | Published Online: 15 January 2021    PDF ( 137 KB )
DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i01.016
Author(s)
डॉ. श्रुति शर्मा 1

1सह आचार्य, हिंदी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर

Abstract

‘ढोलन कुंजकली’ उपन्यास दलित स्त्री केन्द्रित प्रथम उपन्यास है जिसमें दलित नायिका कुंजकली के आधार पर उपन्यास का शीर्षक निर्धारित किया गया है। उपन्यास में दिखाया गया है, कि सामंती संस्कृति में वर्चस्ववादी व्यक्ति प्रायः अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए गरीब एवं दलित व्यक्ति का शोषण करता है। उसके शोषण का भय लोगों में इस तरह से व्याप्त होता है कि उसके शोषण की राजनीतिक जड़ें ध्वस्त हो जाने के पश्चात् भी आम आदमी अपना संतुलन नहीं बना पाता है। ‘ढोलन कुंजकली’ उपन्यास में दलित वर्ग की दयनीय स्थिति को सामन्तकालीन परिदृश्य में अभिव्यक्त किया गया है। इस उपन्यास में एक तरफ ढोली जाति का चित्रण किया गया है, तो दूसरी तरफ सामन्तवादी शोषण व्यवस्था का पर्दाफाश किया गया है।

Keywords
संवेदना, शोषण, सामंती संस्कृति, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, जाति व्यवस्था।
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