जल संरक्षण की समृद्ध परंपरा: राजस्थान की बावड़ियों के विशेष संदर्भ में

Vol-8 | Issue-08 | August-2021 | Published Online: 20 August 2021    PDF ( 223 KB )
DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i08.010
Author(s)
Dr. Bhavna Pareek 1

1Associate Professor (History), B.N.D. Govt. Arts College Chimanpura

Abstract

राजस्थान भारत के सबसे शुष्क क्षेत्र में से रहा है विशेष तौर पर पश्चिमी राजस्थान में अत्यंत अल्प वर्षा होती है। इसी जलाभाव के कारण यहां के निवासियों ने सदैव जल संरक्षण और भंडारण के लिए नए-नए प्रयोग किए हैं। जल संग्रहण हेतु विविध प्रणालियों अपनाई गई जिनमें बावड़ी का प्रमुख स्थान रहा है। राजस्थान में अधिकांश बावड़िया मंदिरों, किलो या मठों के समीप बनाई जाती थी और इन्हें बनवाने हेतु राज परिवार ,सामंत,व व्यापारियों का अत्यधिक योगदान होता था। निजी तौर पर बनवाए जाने वाली बावड़िया सामुदायिक उपयोग के लिए खुली थी। सार्वजनिक उपयोग के लिए हुए जलाशय तथा बावरिया खुदवाना एक परोपकारी गतिविधि भी थी। प्रस्तुत आलेख में इसी जल संग्रहण की बावड़ी प्रणाली का विशेष उल्लेख करने का प्रयास किया गया है।

Keywords
जलाभाव, जल संरक्षण बावड़ी, स्थापत्य, जलस्तर
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