महात्मा गाँधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के आर्थिक विचारों का तुलनात्मक विवेचन

Vol-8 | Issue-01 | January-2021 | Published Online: 15 January 2021    PDF ( 125 KB )
DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i01.012
Author(s)
प्रवीण कुमार 1

1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर (राज.)

Abstract

‘महात्मा गाँधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय का आर्थिक चिंतन’ विशद् है। वस्तुतः ‘महात्मा गाँधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय समग्रतावादी दार्शनिक चिंतक थे। तथापि वे व्यष्टि एवं समष्टि के विषय में भौतिकवाद एवं आध्यात्मवाद दोनों में सामंजस्पूर्ण दृष्टिकोण रखते थे। उनकी अवधारणा पाश्चात्य संस्कृति के पूँजीवादी और समाजवाद दोनों के विरूद्ध थी। महात्मा गाँधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय पाश्चात्य भोगवादी जीवन शैली के कदापि पक्षधर नहीं रहे। वे इसी भाँति समाजवादी अथवा साम्यवादी व्यवस्था के अन्तर्गत सर्वहारा अथवा राज्य की निरंकुशतापूर्ण व्यवहार को मानव के सर्वांगीण विकास में सदैव बाधक ही मानते थे। उनके आर्थिक चिंतन की सत्यता सदैव भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर अवलम्बित रही है।

Keywords
आर्थिक चिंतन, विशद्, समग्रतावादी, पूँजीवादी, भोगवादी, साम्यवादी, निरंकुशतापूर्ण।
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