महात्मा गाँधी की सामाजिक न्याय की अवधारणा: अस्पृश्यता निवारण के विशेष संदर्भ में
| Vol-5 | Issue-02 | February-2018 | Published Online: 05 February 2018 PDF ( 115 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| महेन्द्र कुमार शर्मा 1 | ||
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1शोधार्थी, राजनीतिक विज्ञान विभाग, जयपुर (राज.) |
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| Abstract | ||
भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था एवं जाति प्रथा के प्रति गाँधी के विचारों के तथ्यपरक विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि गाँधी ने सांस्कृतिक मूल्यों के समर्थन के साथ-साथ उन सभी मान्यताओं का खण्डन किया है, जो मानव के भूलभूत अधिकारों के विरोध में दिखलाई पड़ते है। राजनीतिक आवश्यकताओं एवं बाध्यताओं से परे हटकर यदि हम गाँधी के विचारों का मूल्यांकन करें तो यह स्पष्ट होता है कि गाँधी पहले ऐसे विचारक है, जिन्होंने समग्र के हित चिंतन के लिए विकृतिपूर्ण व्यवस्था से प्रभावित लोगों को मानवतावादी जीवन जीने के योग्य बनाने का प्रयास किया। |
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| Keywords | ||
| अस्पृश्यता, सामाजिक न्याय, वर्ण, छुआछूत, समानता। | ||
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