महिला सशक्तीकरण की अवधारणा: सामान्य अवलोकन
| Vol-8 | Issue-07 | July-2021 | Published Online: 05 July 2021 | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i07.003 | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Hukma Ram Suthar 1 | ||
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1Associate Professor, Govt. PG Girls Collage, Barmer, Rajasthan |
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| Abstract | ||
महिला सशक्तीकरण के सन्दर्भ में यह जानना अति आवश्यक है कि महिला सशक्तीकरण के वास्तविक सूचक या संकेतक क्या होने चाहिए जिससे यह पता चल सके कि उस दिशा में किया गया कार्य किस सीमा तक प्रभावी हुआ है। सशक्तीकरण के सम्बन्ध में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे को सशक्त नहीं करता। विकास के सन्दर्भ में इस शब्द के प्रयोग का अर्थ गरीब एवं अभिवंचित वर्ग द्वारा स्वतः प्रयासों द्वारा अपने को सशक्त करना है। अतः यह स्पष्ट होना चाहिए कि सशक्तीकरण कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो जनसाधारण को उठाकर दे दी जाए। सशक्तीकरण की प्रक्रिया व्यक्तिगत भी है और सामूहिक भी। व्यक्ति के समूह से जुड़ाव के कारण उसकी जानकारी एवं ज्ञान में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है तथा अपने को संगठित कर अपने जीवन स्तर में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की क्षमता भी जागृत होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सशक्तीकरण की प्रक्रिया सहभागिता पर आधारित है। यह गरीबों में उनके जीवन को प्रभावित करने वाले विषयों पर स्वतन्त्र रूप से निर्णय लेने की शक्ति का संचार करती है। |
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| Keywords | ||
| महिला, सशक्तीकरण, सहभागिता, समग्र विकास। | ||
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