हिन्दी कहानी में भूमण्डलीकरण के विभिन्न आयाम
| Vol-07 | Issue-05 | May-2020 | Published Online: 15 May 2020 PDF | ||
| Author(s) | ||
| Geetanjali Meena 1 | ||
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1Associate Professor (Hindi), Government college, Chaksu |
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| Abstract | ||
| भूमण्डलीकरण समकालीन विश्व की एक महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया है, जिसने मानव जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। भारत में 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भूमण्डलीकरण की प्रक्रिया ने तीव्र गति प्राप्त की। इसका प्रभाव केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज, संस्कृति, भाषा, साहित्य और मानवीय संबंधों तक विस्तृत हुआ। हिन्दी कहानी ने इस परिवर्तनशील यथार्थ को अत्यंत संवेदनशीलता और गहराई के साथ अभिव्यक्त किया है। समकालीन कहानीकारों ने बाजारवाद, उपभोक्तावाद, नारी विमर्श, सांस्कृतिक संकट, प्रवासी जीवन, भाषा और तकनीक के प्रभावों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया है। प्रस्तुत शोध-पत्र में हिन्दी कहानियों के माध्यम से भूमण्डलीकरण के विभिन्न आयामों का विश्लेषण किया गया है। | ||
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