भारत में मुस्लिम महिलाओं की शैक्षिक स्थिति: एक अवलोकन

Vol-8 | Issue-09 | September-2021 | Published Online: 13 September 2021    PDF ( 307 KB )
DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i09.010
Author(s)
निक्हत जबीं 1; डाॅ. पी. एन. यादव 2

1शोध छात्रा, विश्वविद्यालय आईआरपीएम विभाग, ति.मा. भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

2भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय आईआरपीएम विभाग ति.मा. भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

Abstract

शिक्षा समग्र समाज की प्रगति और विकास के लिए बुनियादी और मूलभूत आवश्यकता है। शिक्षा में लैंगिक असमानताएं अत्यधिक लैंगिक पक्षपाती सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं की असमान स्थिति को दर्शाती हैं। यह न केवल विकसित समाजों के लिए बल्कि भारत जैसे विकासशील समाजों के लिए भी एक वास्तविकता है, जहां महिलाओं को शैक्षिक कार्यक्रमों और सुधारों की एक श्रृंखला के बावजूद आज भी पिछड़ी अवस्था में है, अर्थात् दुनिया की लगभग आधी आबादी पिछड़ी अवस्था में है। उसमें भी हमारे आधुनिक समाज में मुस्लिम महिलाएं सबसे पिछड़ी अवस्था में हैं। शिक्षा मुस्लिम महिलाओं को उनके आर्थिक एवं सामाजिक संकट से बाहर निकालने का सर्वोत्तम उपाय है। क्योंकि सभी धार्मिक समुदायों में, महिला समाज का सबसे कम शिक्षित वर्ग है और उनमें भी मुस्लिम महिलाएं सबसे कम शिक्षित हैं। भारत में गैर-मुस्लिम महिलाओं की तुलना में मुस्लिम महिलाओं का पिछड़ापन वर्तमान में चिंता का विषय बन गया है। यद्यपि इस्लाम एक धर्म के रूप में महिलाओं की शिक्षा की प्राप्ति पर अपना पूरा जोर देता है, फिर भी उनके पिछड़ेपन के कई सामाजिक कारण हैं जैसे परिवार का बड़ा आकार, गरीबी, लड़कियों की शिक्षा के प्रति नकारात्मक रवैया, मदरसा शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के बीच संबंध की कमी आदि। प्रस्तुत आलेख का उद्देश्य भारत में मुस्लिम महिलाओं की शैक्षिक स्थिति, उनकी निरक्षरता के कारणों एवं संभव समाधान का अध्ययन करना है।

Keywords
शिक्षा, साक्षरता, मुस्लिम महिलाएं, महिला शिक्षा, शैक्षिक स्थिति।
Statistics
Article View: 398