भारत में लोकतंत्र से तात्पर्य एवं इसके विकास का अध्यन
| Vol-5 | Issue-05 | May-2018 | Published Online: 01 May 2018 PDF ( 2 MB ) | ||
| Author(s) | ||
| Narendra Kumar 1 | ||
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1Assistant Professor, Political Science, Govt. Dungar College, Bikaner, Rajasthan |
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| Abstract | ||
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय लोगों की आशाएं व सपने थे वह आषाएं व सपने सभी धुल में मिल गए है।चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल विद्यमान है दलिय राजनीति के कारण देश का सर्वागीण विकास थम सा गया है अथवा उसकी गति काफी कम हुई है । जिसके कारण लोगों का भारत के राजनीतिक दलों और राजनेताओं की मन्सा पर सन्देह होने लगा है और साफ सुथरे शासन व राजनीतिक व्यवस्था के लिए कोई भी कीमत अदा करने के लिए तैयार है । जनता में व्याप्त इन सन्देह व असन्तोश को महात्मा गांधी ,आचार्य विनोबा भावे तथा जय प्रकाश नारायण ने समय काफी समय से भांप लिया था और इसके लिए उन्होंने दल रहित लोकतन्त्र का विचार प्रस्तुत किया था । जिसके द्वारा वह भारतीय लोकतन्त्र को अधिक सुरक्षित और स्थिर बना सकते थे । परन्तु आधुनिक लोकतन्त्रवादियों और ृदम लोकतन्त्र समर्थकों के द्वारा उन महान आत्माओं के विचार जन साधारण तक नहीं पहुंच सके है, मैने अपने शोध कार्य के द्वारा उनके दल रहित लोकतन्त्र सम्बन्धी विचारों को जन-साधारण तक पहुंचाने और भारतीय लोकतन्त्र में आ चुके दोषों को दूर करने का प्रयास किया है । मैं दल रहित लोकतन्त्र सम्बन्धी अपने विचारों को प्रस्तुत करने से पहले शोधकार्य व उसके उददेष्यों के बारे में जानकारी देना चाहुंगा । |
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