मैत्रेयी पुष्पा के औप्न्यसिक रचनाओं में बुंदेलखंडी संस्कृति का प्रभाव
| Vol-8 | Issue-09 | September-2021 | Published Online: 13 September 2021 PDF ( 329 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i09.007 | ||
| Author(s) | ||
डा0 वन्दना शर्मा
1;
हरिश्चंद्र यादव
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1एसोसियेट प्रोफेसर-हिन्दी विभाग, मुलतानीमल मोदी काॅलेज, मोदीनगर (गाजियाबाद)-201204 2शोध छात्र, मुल्तानीमल मोदी कॉलेज, मोदीनगर |
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| Abstract | ||
साहित्य समाज का दर्पण है तथा समाज को बदलने की बड़ी ताकत रखता है | समाज में घटित हो रही विभिन्न घटनाओं को साहित्यकार ही कलम देकर जो उस निर्बाध सत्य को प्रसारित करता है | जो कल्पनाओं में गूंथा हुआ होकर भी समाज के लिए एक प्रेरणा-प्रेरक का कार्य करता है | हिंदी साहित्य जगत में कितने ही सहित्यकार कलम के सिपाही बनकर ही समाज के लिए कोई न कोई आदर्श उदाहरण अथवा ज्वंलत प्रश्न प्रस्तुत करते रहे है | बीसवी शताब्दी के उत्तरार्ध में हिंदी उपन्यासों में नारी विषयक अथवा नारी विमर्श को प्रश्रय देने वाले उपन्यासों का सर्जन हुआ तथा इन विषयों पर नारी लेखिकाओं ने भी अपने सशक्त हस्ताक्षर किए | ऐसे ही नारी विषयों पर कलम चलाने वाली, नारी के मर्म को अभिव्यक्ति देने वाली एक महिला लेखिका का नाम है - मैत्रेयी पुष्पा | जब तक साहित्यकार के साहित्य को तराशा नहीं जाएगा तो उसके साहित्य के गूढतम रहस्य हम तक नहीं पाएगे | |
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| Keywords | ||
| बुन्देलखंडी, पितृसत्तात्मक व्यवस्था, शील ओर सतीत्व, स्त्री का दुर्भाग्य,सामाजिक चेतना,अंचल विशेष,वर्तमान नारी | ||
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