वर्तमान परिदृश्य में उच्च शिक्षा में मानवीय मूल्यों की आवश्यकता

Vol-07 | Issue-03 | March-2020 | Published Online: 05 March 2020    PDF ( 252 KB )
Author(s)
डॉ० (श्रीमती) गीता सिंह 1

1एसोसिएट प्रोफेसर (बी०एड०), दिग्विजय नाथ पी०जी० कालेज, गोरखपुर

Abstract

किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था में उच्च शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि उच्च शिक्षा में ही देश की सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था को नेतृत्व प्रदान करने की शक्ति निहित होती है। अतः उच्च शिक्षा के उद्देश्यों का निर्धारण राष्ट्रीय आकांक्षाओं तथा आदर्शों को ध्यान में रखकर किये जाने पर बल दिया जाता है। अतः देश की उच्च शिक्षा के उद्देश्यों को निर्धारित करने पर समय  गठित विभिन्न शिक्षा आयोगों ने अपने सुझाव दिये हैं। आयोगों द्वारा निर्दिष्ट सुझावों के अवलोकन से दृष्टिगत होता है कि उच्च शिक्षा को उद्देश्य व्यक्ति, समाज व राष्ट्र का उत्कर्ष करना तथा अन्तर्राष्ट्रीयता की भावना को प्रोत्साहित करना है। इस भाव से उच्च शिक्षा का एक पक्ष भारतीय चिन्तन परम्परा से जुड़े मानवीय मूल्यों से भी है जो संबंधित उद्देश्यों के प्राप्ति हेतु सहायक हैं। इस आशय से इस शोध पत्र के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि मानवीय मूल्य क्या है शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु इन मूल्यों की क्या आवश्यकता है तथा किस प्रकार उच्च शिक्षण संस्थाओं में इन मूल्यों को प्रतिस्थापित किया जाय जिससे व्यक्ति समाज व राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित है। वैश्विक स्तर पर राष्ट्र की पहचान बने तथा इन मानवीय मूल्यों के माध्यम से प्राचीन भारतीय परम्परा, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से अन्तर्राष्ट्रीय अवबोध का विस्तार करते हुए उच्च शिक्षा एक मानक स्थापित करने में सफल हो।

Keywords
वसुधैव कुटुम्बकम, उच्च शिक्षा, शिक्षण-प्रशिक्षण, अनुसंधान
Statistics
Article View: 307