सन्त गरीबदास के विचारों का सामान्य विश्लेषण
| Vol-8 | Issue-01 | January-2021 | Published Online: 15 January 2021 PDF ( 118 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i01.013 | ||
| Author(s) | ||
| रामचन्द्र शर्मा 1 | ||
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1हिन्दी विभाग राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर |
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| Abstract | ||
संत गरीबदास के द्वारा दिये गये सिद्धान्त व उपदेशों को वर्तमान की कसौटी पर कसने से यह पूर्णतः स्पष्ट है कि उनके द्वारा दिये गये धार्मिक एवं सामाजिक विचार वर्तमान में पूर्णतः प्रासंगिक है। संत गरीबदास ने अपने युग की समस्याओं का गहराई से अवलोकन करते हुए उनमें व्याप्त बुराईयों के निवारण हेतु उचित मार्ग प्रशस्त किया है। सन्तों ने अपनी वाणी में समन्वयवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए मानवता का स्वर मुखरित किया है। संत गरीबदास ने समाज मंे प्रचलित धार्मिक आडम्बरों, रूढ़ियों, परम्पराओं का विरोध किया एवं ईश्वर प्राप्ति के लिए सद्कर्म एवं साधना को श्रेष्ठ साधन माना। उन्होंने समाज मंे व्याप्त जाति प्रथा, ऊँच-नीच, सम्प्रदायवाद, काफिरबोध की आलोचना करते हुए सामाजिक एकता व आपसी समन्वय को प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया। |
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| Keywords | ||
| सम्प्रदायवाद, काफिरबोध निष्ठा, त्याग, तप, दया, शील, वैराग्य | ||
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