लोक कथा के विधायक तत्त्व
| Vol-1 | Issue-4 | November-2014 | Published Online: 05 November 2014 PDF ( 397 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Rekha Mishra 1 | ||
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1 Lecturer (Hindi), Government College, Newai (Tonk), Rajasthan |
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| Abstract | ||
लोककथाएँ किसी समाज की सांस्कृतिक स्मृति, जीवनानुभव और नैतिक मूल्यों की अमूल्य धरोहर होती हैं। ये न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि लोकजीवन के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित करने का माध्यम भी हैं। लोककथाओं में जीवन के विविध अनुभवों, संघर्षों, मान्यताओं और आदर्शों का सार निहित होता है। इन कथाओं के माध्यम से समाज अपने आदर्श जीवन-मूल्यों, परंपराओं और लोकदर्शन को जीवित रखता है। लोककथाओं के ‘विधायक तत्त्व’ अर्थात् सृजनात्मक, प्रेरणात्मक और शिक्षाप्रद तत्व समाज के नैतिक निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें अच्छाई की विजय, बुराई का दमन, सत्य, साहस, न्याय, प्रेम, करुणा, दया और सहयोग जैसे मानवीय मूल्यों का संदेश निहित होता है। लोककथाएँ केवल कल्पना या रहस्य की कहानियाँ नहीं, बल्कि जीवन की व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा का स्रोत हैं। इन कथाओं में समाज का सामूहिक अनुभव और लोकबुद्धि बोलती है। लोककथाएँ समाज को दिशा देती हैं—वे लोगों को आचरण, नीति, और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। साथ ही, इनमें लोकनायकों, देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और सामान्य मनुष्यों के माध्यम से जीवन के आदर्शों को रूपकात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। यही उनका विधायक पक्ष है, जो लोकजीवन में नैतिक चेतना और सामाजिक समरसता को बनाए रखता है। |
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| Keywords | ||
| लोककथा, लोकजीवन, नैतिक मूल्य, लोकसंस्कृति, विधायक तत्त्व, सामूहिक चेतना, सामाजिक समरसता। | ||
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