गांधी के राजनीतिक दर्शन में नैतिकता और धर्म का स्थान: समकालीन भारतीय राजनीति के सन्दर्भ में अध्ययन

Vol-2 | Issue-8 | August-2015 | Published Online: 10 August 2015    PDF ( 422 KB )
Author(s)
Dr. Manju Lata Sharma 1

1Lecturer, Political Science, Government College, Newai (Tonk), Rajasthan

Abstract

महात्मा गांधी का राजनीतिक दर्शन भारतीय चिंतन परंपरा में एक ऐसा अध्याय है जिसमें राजनीति, नैतिकता और धर्म का अद्भुत सामंजस्य दिखाई देता है। भारतीय दर्शन सदैव से धर्म और नैतिकता को सामाजिक जीवन का मूल मानता रहा है, परंतु गांधी ने इन सिद्धांतों को केवल वैचारिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप में राजनीतिक जीवन में लागू किया। उन्होंने राजनीति को ‘लोकसाधना’ का क्षेत्र कहा, जहाँ सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा ही सर्वोच्च उद्देश्य है। गांधी के अनुसार राजनीति यदि नैतिकता से विहीन हो जाए तो वह हिंसा, अन्याय और स्वार्थ का माध्यम बन जाती है। इसीलिए उन्होंने राजनीति को ‘आत्मानुशासन’ और ‘आत्मशुद्धि’ का साधन माना। गांधी की राजनीति मूलतः एक नैतिक क्रांति थी—एक ऐसी क्रांति जिसमें मनुष्य के भीतर से परिवर्तन प्रारंभ होता है। गांधी का आदर्श न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय जीवन के लिए भी दिशा प्रदान करता है।

Keywords
गांधी, राजनीतिक दर्शन, नैतिकता, धर्म, मूल्य आधारित राजनीति, समकालीन भारत, लोकतंत्र।
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