नारीवादी आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाएं एवं संविधानिक प्रावधान एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Vol-5 | Issue-03 | March-2018 | Published Online: 05 March 2018    PDF ( 350 KB )
Author(s)
चंद्रदीप नंदलाल यादव 1

1शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर

Abstract

निवर्तमान समय में महिलाओं के उत्थान और विकास के लिए भारत सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित  की जा रही है एक तरफ भारतीय संविधान में महिलाओं के उत्थान के लिए हमें संविधानिक प्रावधान किए गए हैं वहीं दूसरी ओर यह रूप में भारत सरकार द्वारा इनके उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही है वास्तव में आज महिलाओं की स्थिति जिसको हम संवैधानिक रूप में एवं वैश्विक सरकारों द्वारा क्रियान्वित रूप में देख रहे हैं वह नारीवादी आंदोलन का ही परिणाम कहां जा सकता है वास्तव में नारीवादी शब्द का पहली बार उपयोग काल्पनिक समाजवादी चार्ल्स फोरियर ने 1837 में महिलाओं के लिए समान अधिकार का उल्लेख करने के लिए किया नारीवादी आंदोलन के पहले चरण में महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों पर जोर दिया गया दूसरे चरण में महिलाओं की सामाजिक समानता तथा कानूनी समानता पर बल दिया गया तीसरे चरण में दूसरे चरण के आंदोलन की कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया इस आंदोलन की शुरुआत 1990 में हुई वास्तव में नारीवादी विचारधारा उत्तर आधुनिक विचारधारा है यद्यपि उदारवादी नारीवादी नारीवादी आंदोलन का पहला चरण माना जाता है महिलाओं के मताधिकार पुरुषों के समान ही अधिकार प्रदान किए जाने चाहिए इस के संदर्भ में अमेरिका विचारक बेटी फ्रीडम ने अपनी रचना मैं उस सांस्कृतिक विद्या को दूर करने का प्रयास किया जिसमें यह मारा जाता है कि घरेलू जीवन में महिलाओं की सुरक्षा एवं पूर्णता की प्राप्ति होती है इसी मान्यता के कारण रोजगार राजनीति और सामाजिक जीवन में महिलाओं के प्रवेश को हतोत्साहित किया जाता है इन्हीं परिणाम स्वरूप भारत सरकार ने ने वर्तमान समय में महिलाओं के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाओं की क्रियान्विती भारतीय संविधान के उपबंध  अनुसार कर रही है

Keywords
सशक्त, योजनाएं ,नारीवाद ,महिला वादी, संविधानिक, क्रियान्वित, सांस्कृतिक, उदारवादी ,अभिनव नारी, महिला
Statistics
Article View: 296