भारत में मानवाधिकार संरक्षण एवं विकास: एक विश्लेषण
| Vol-4 | Issue-11 | November-2017 | Published Online: 05 November 2017 PDF ( 340 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| डॉ. शिव कुमार मीणा 1 | ||
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1व्याख्याता, लोक प्रशासन राजकीय कला महाविद्यालय सीकर (राज.) |
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| Abstract | ||
आज मानवाधिकारों की गूँज विश्व के हर कोने में गूँज रही है, चाहे वह राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा हो या अंतर्राष्ट्रीय स्तर का। मानवाधिकार की जानकारी वर्तमान समाज में सभी के लिए अधिक अति प्रासंगिक हो गई है। मानव अधिकारों को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मान्यता प्राप्त हो चुकी है तथा मानवाधिकार राष्ट्र की प्रगति का मापदंड भी बन गये हैं। हमारे देश के नागरिकों को भी मानवाधिकार हमारे संविधान में मौलिक अधिकारों व अन्य अधिकारों के साथ प्रदान किये जा चुके हैं। साथ ही मानवाधिकारों को संरक्षण एवं प्रभावी ढंग से लागू करने तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रावधान के प्रति अपनी वचनबद्धता प्रदर्शित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं राज्य स्तर पर राज्य मानवाधिकार आयोग गठन किया गया है। मानवाधिकारों का संरक्षण आज विश्व के समक्ष विकट चुनौती है। संपूर्ण मानव जाति शोषण, अत्याचार,उत्पीड़न एवं आतंकवाद की शिकार हो रही है। मानवाधिकारों के संरक्षण हेतु विभिन्न राष्ट्रों के अनेकानेक प्रयासों के पश्चात भी मानवाधिकार आम आदमी के लिए कल्पना बने हुए हैं। इनका संरक्षण तभी संभव होगा जब हम स्वयं अपने आचरण से शुरू कर मनसा, वाचा, कर्मणा इस प्रकार का संकल्प लें कि हम मानव को मानव मानकर उनके साथ मानवीय व्यवहार करेंगे। |
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| Keywords | ||
| मानवाधिकार, अंतर्राष्ट्रीय, वचनबद्धता, आयोग | ||
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