सामाजिक-आर्थिक विकास में जल संसाधनों की भूमिका
| Vol-8 | Issue-06 | June-2021 | Published Online: 07 June 2021 PDF ( 255 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i06.002 | ||
| Author(s) | ||
| दिनेश कुमार 1 | ||
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1शोध छात्र, स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर |
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| Abstract | ||
जल एक बुनियादी संसाधन होने के कारण किसी क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जबकि जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगीकरण और अन्य घटकों ने जल संसाधन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। साथ ही उपरोक्त कारकों के कारण जल की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप वर्तमान समय में जल संसाधन क्षमता दिन-प्रति-दिन कम होती जा रही है। जबकि स्वास्थ्य को बनाए रखना, भोजन उगाना, पर्यावरण का प्रबंधन करना और रोजगार सृजित करना आदि महत्वपूर्ण कार्य जल के बिना संभव नहीं है। जल और देश के आर्थिक-सामाजिक विकास के बीच घनिष्ठ संबंध है। एक तरफ जहां जल की कमी सतत् सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा है, वहीं दूसरी तरफ विकास की कमी जल की समस्याओं को हल करने में बाधा है। जल सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे के एक तत्व के रूप में कार्य करती है। जल प्राकृतिक उत्पादक प्रक्रिया की विस्तृत विविधता में योगदान देता है, जिसमें खाद्य उत्पादन और विनिर्माण कार्यों जैसे सीधे उत्पादक गतिविधियों और बुनियादी आर्थिक बुनियादी ढांचे के एक तत्व के रूप में शामिल हैं। जल बुनियादी मानव कल्याण को भी प्रभावित करता है। घरेलू जल आपूर्ति प्रत्यक्ष उपभोक्ता वस्तु के रूप में अपनी भूमिका में कल्याण के एक बुनियादी घटक के रूप में कार्य करती है। इस आलेख का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों और सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच संबंधों का अध्ययन करना है। |
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| Keywords | ||
| जल संसाधन, आर्थिक एवं सामाजिक विकास, रोजगार, शहरीकरण | ||
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