भारतीय वाद्य संगीत और इसकी उत्पत्तिः एक अध्ययन
| Vol-1 | Issue-3 | October-2014 | Published Online: 05 October 2014 PDF ( 202 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Nutan Kavitkar 1 | ||
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1Lecturer (Department of Music), Govt. Meera Girls college Udaipur Rajasthan |
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| Abstract | ||
संगीत इस खूबसूरत दुनिया में हर जगह पाया जाता है। जैसे हर कला को अपने उपकरण और विशिष्टता को व्यक्त करने के लिए एक मजबूत माध्यम की आवश्यकता होती है, उसी तरह एक संगीत वाद्ययंत्र ‘नाद‘ को व्यक्त करने का एक माध्यम है, जिसका महत्व पूरे विश्व में है। भारतीय संगीत में वाद्य संगीत का महत्वपूर्ण स्थान है। यह संगीत के तीन पहलुओं में से एक है (गायन संगीत, वाद्य संगीत और नृत्य) जिसे भारतीय संगीत में ‘संगीत‘ के रूप में भी जाना जाता है। वाद्य संगीत को ‘‘वाध्य संगीत‘‘ के रूप में जाना जाता है। वाद्य संगीत की शुरुआत से ही, दो घटक बहुत महत्वपूर्ण हैं- यंत्र और वाद्य यंत्र या वाद्य वादक (कलाकार)। उपरोक्त वर्णित किसी एक घटक के अभाव में संगीत कला का प्रकटीकरण असम्भव है। संगीत को प्राचीन काल से ही भावनाओं को व्यक्त करने के सीधे माध्यम के रूप में जाना जाता है। वर्तमान अध्ययन भारतीय संगीत वाद्ययंत्र की उत्पत्ति का आकलन करता है। |
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| Keywords | ||
| कलाकार, संगीत, नृत्य, संगीत वाद्ययंत्र | ||
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