मधुराभक्ति: एक विवेचन

Vol-4 | Issue-08 | August-2017 | Published Online: 05 August 2017    PDF ( 136 KB )
Author(s)
डाॅ0 चिन्मयी कुमारी 1

1व्याख्याता, संस्कृत विभाग, एस॰डी॰एम॰वाई॰ डिग्री महाविद्यालय, धोरैया, बांका तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

Abstract

भक्तितत्व को काव्यशास्त्रीय रस के रूप में प्रतिष्ठापित करने में आचार्य सरस्वती का अप्रतिम योगदान तो रहा ही है साथ ही आवन्तर कालीन अन्य आचार्यों ने भी उनकी इस अभिनव स्थापना से प्रेरणा ग्रहणकर अपने-अपने ग्रन्थों में एतांषयक सिद्धान्त की विस्तृत समीक्षा कर अलंकारशास्त्र के सिद्धान्तपक्ष में उपबृंहता में अपनी-अपनी विलक्षण प्रतिभा का चमात्किारिक प्रकाशन किया है।

Keywords
भजनम्, भक्ति, स्वर्ग, मोक्ष
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