सम्पूर्ण क्रान्ति की अवधारणाः- जय प्रकाश नारायण के विशेष संदर्भ में
| Vol-5 | Issue-02 | February-2018 | Published Online: 05 February 2018 PDF ( 145 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Pankaj Bhardwaj 1 | ||
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1Research Scholar & Asst. Professor (Political Science), Shaheed Bhagat Singh, P.G. College, Hingoniya, Jaipur |
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| Abstract | ||
सम्पूर्ण क्रान्ति के लिए जयप्रकाश के अनुसार ‘‘विभिन्न प्रकार के संघर्ष और रचनात्मक कार्य करने पडे़गें। उनके अनुसार ‘‘हमारे आंदोलन ने जनता को बुरी तरह झंकृत कर दिया है। अब केवल उन्हें यह विश्वास दिलाना शेष रह गया है कि छात्रों और अन्य वर्गों की भांति यह आंदोलन उनका अपना है। इस दृष्टि से निर्धन और सामान्य जनता के हितार्थ कुछ कार्यक्रम लाना चाहिए। उदाहरणार्थ भूमिहीनों में भूमि वितरण, कृषि मजदूरों को उचित मजदूरी देना, सिंचाई कर, भू-राजस्व, सड़क टैक्स, स्वास्थ्य टैक्स जैसे करों का उन्मूलन करना, आदिवासियों की समस्याओं का निवारण, दहेज प्रथा का उन्मूलन, हरिजन, आदिवासियों और स्त्रियों को समानता का स्तर प्रदान करना और जनता की तात्कालिक समस्याओं का निवारण करना जैसे कि अन्न, तेल आदि की उपलब्धि, बाढ़ सहायता कार्य आदि। इस प्रकार सम्पूर्ण क्रांति के लिए चर्तुविधि कार्यक्रम शिक्षणात्मक, संगठनात्मक, रचनात्मक और संधात्मक हाथ में लेना होगा। |
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| Keywords | ||
| सम्पूर्ण क्रांति, शोषण, विषमता, सामाजिक न्याय, असमानता। | ||
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