परंपरा से आधुनिकता की ओर: भारतीय समाज में सामाजिक संरचना और जीवनशैली का रूपांतरण
| Vol-2 | Issue-10 | October 2015 | Published Online: 05 October 2015 PDF ( 337 KB ) | ||
| Author(s) | ||
| Dr. Prabha Gupta 1 | ||
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1Lecturer, Sociology, M.P. Govt. P.G. College, Chittorgarh, Rajasthan |
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| Abstract | ||
भारतीय समाज एक संक्रमणशील समाज है, जहाँ परंपरा और आधुनिकता के बीच लगातार संवाद और संघर्ष चलता रहता है। परंपरा ने समाज को नैतिक अनुशासन, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक स्थायित्व प्रदान किया है। सामूहिकता और पारिवारिक बंधन परंपरा की नींव माने जाते हैं। औद्योगिकीकरण और नगरीकरण ने समाज में आधुनिकता के तत्वों को प्रवेश करने का अवसर दिया, जबकि शिक्षा और वैश्वीकरण ने मूल्य प्रणाली और जीवनशैली में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए। आधुनिकता ने तर्कशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया। परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करना समाज की बड़ी चुनौती है। कई मामलों में आधुनिक तकनीक और जीवनशैली पारंपरिक मूल्यों के साथ सहअस्तित्व में हैं। सामाजिक संरचना में परिवर्तन के बावजूद परंपरागत सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। यह संक्रमण केवल संघर्ष ही नहीं, बल्कि सामंजस्य की प्रक्रिया भी है। परिवार, धार्मिक आस्था और लोकपरंपराएँ आज भी समाज को जोड़ती हैं। समाज ने परिवर्तन और स्थायित्व के बीच संतुलन बनाकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। भविष्य में भारतीय समाज की दिशा इस संतुलन पर निर्भर करेगी, जो समाज को सशक्त, लचीला और प्रगतिशील बनाए रखेगा। इस प्रकार, परंपरा और आधुनिकता दोनों मिलकर भारतीय समाज की वास्तविक शक्ति और पहचान तय करते हैं। |
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| Keywords | ||
| परंपरा, आधुनिकता, सामाजिक परिवर्तन, मूल्य, जीवनशैली, भारतीय समाज, संक्रमण | ||
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Statistics
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