ग्रामीण समाज में अनुसूचित जाति की महिलाओं पर आधुनिकीकरण का प्रभाव
| Vol-8 | Issue-07 | July-2021 | Published Online: 05 July 2021 PDF ( 113 KB ) | ||
| DOI: https://doi.org/10.53573/rhimrj.2021.v08i07.001 | ||
| Author(s) | ||
| योगेश मैनाली 1 | ||
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1शोधार्थी, समाजशास्त्र विभाग, राजकीय महाविद्यालय, रामनगर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल, उत्तराखण्ड |
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| Abstract | ||
ग्रामीण समाज के मूल्यों तथा जीवन शैली में आधुनिकीकरण के मूल्य व प्रवृतियाँ अपनी जगह बना रहे हैं। जहाँ पहले ग्रामीण समुदाय में आध्यात्मवाद, धर्म, ईश्वर तथा नैतिकता का परम स्थान होता था, वही आज इन मूल्यों पर आधुनिकीकरण के मूल्य जैसे बाह्य आडम्बर, कृत्रिमता ने अपनी छाप छोड़ दी है। ग्रामीण समाज में लोगों की जीवन शैली, सामाजिक नियंत्रण तथा जीवन मूल्यों को कभी धर्म नियंत्रित करता था, वहीं आज सामाजिक नियंत्रण की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था ने ले ली है। ग्रामीण सामाजिक जीवन पर आधुनिकीकरण का व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिसका प्रभाव ग्रामीण समाज के लोगों के खानपान, रहन-सहन तथा उनकी जीवन शैली में स्पष्ट दिखाई देता है। ग्रामीण समाज की सामाजिक संरचना के अंतर्गत ग्रामीण मूल्यों तथा जीवन शैली में आधुनिकीकरण की प्रवृतियाँ स्पष्ट दृष्टिगोचर दिखाई देती हंै। आधुनिकीकरण ने ग्रामीण समाज के परिवार, विवाह, जीवन शैली परंपराओं तथा रीति-रिवाजों को प्रभावित कर ग्रामीण समाज का एक नया ढाँचा प्रस्तुत किया है। आधुनिकीकरण की प्रक्रियाओं का ही नतीजा है कि ग्रामीण समाज में अनुसूचित जाति की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा राजनैतिक प्रस्थिति में सकारात्मक प्रभाव दृष्टिगोचर होते दिखाई देते हैं। आधुनिकीकरण के प्रभाव का ही परिणाम है कि ग्रामीण समाज में सदियों से चले आ रहे अंधविश्वास, धर्मान्धता, भाग्यवादिता तथा रूढ़िवादिता का प्रभाव कम होता दिखाई दे रहा है। आज ग्रामीण समुदाय विकास के पथ का अनुसरण कर विकास की दिशा को सकारात्मक गति दे रहा है। आधुनिकीकरण का प्रभाव ग्रामीण समाज की अनुसूचित जाति की महिलाओं पर भी बहुत अधिक दिखाई दे रहा हैं, जहाँ वे शिक्षित व जागरूक होकर अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही हंै। वहीं दूसरी ओर उन्हें रोजगार व स्वरोजगार के नये-नये अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। इनसे वे आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। अधुनिकीकरण की प्रक्रिया से ग्रामीण समाज में सामाजिक प्रतिमानों तथा जातिगत भेदभावों की प्रबलता में आई कमी से ग्रामीण समाज की अनुसूचित जाति की महिलाओं को सम्मानजनक सामाजिक स्तर प्राप्त हो रहा है। ग्रामीण समाज में ऐसा शायद ही कोई गांव होगा, जो आधुनिकीकरण के प्रभाव से अछूता रहा हो। धार्मिक अंधविश्वासों, परंपराओं व रूढियों के पालन करने के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले ग्रामीण समाज में आधुनिकीकरण की प्रवृतियों के प्रभाव से सामाजिक- आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, सामाजिक-धार्मिक, सामाजिक- राजनैतिक तथा सामाजिक-शैक्षणिक परिवर्तन ग्रामीण समाज में आज स्पष्टतः परिलक्षित हो रहे हैं। |
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| Keywords | ||
| सामाजिक-सांस्कृतिक, सामाजिक-धार्मिक, सामाजिक- राजनैतिक | ||
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